लॉकडाउन -17

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एक पाती...
क्या बात है प्रधानमंत्री जी आपने तो कमाल ही कर दिया। एक बार फिर कोरोना महामारी से लोगों को बाहर निकाल दिया, भले ही हमारे बीस जवान चिनियो ने शहीद कर दिया, लेकिन लोगों के दिमाग़ से कोरोना का डर तो आपने भगा ही दिया। अब सब तरफ़ चीनी समानो के बहिष्कार में लोग लग गए हैं, वे जानते है आप सरकार में होने के कारण चीनी समानो की बहिष्कार नहीं कर सकते जबकि आपकी इच्छा तो चीनी तक के बहिष्कार की है!
इस देश की जनता सीधी-सादी है ना, और सबसे सीधे तो प्रधानमंत्री जी आप स्वयं हैं, और आपसे भी लाख गुणा सीधे हमारे गृह और रक्षा मंत्री जी हैं। पूरी दुनिया में कुछ भी हो जाए इन्हें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता और आप ही एकमात्र सच्चे आदमी हो , जो संकट के समय सबसे पहले खड़े हो जाते हो इसलिए ममता बेनर्जी से आपकी इतनी बैर होने के बाद जव बंगाल में तूफ़ान आया तो आप ही सबसे पहले खड़े हुए। कोरोना से जब लोग तिल तिल कर मरने लगे तब आपने बीस लाख करोड़ रुपया दे दिया और फिर लोग मर जाएँगे तो फिर चालीस लाख करोड़ रुपया दे दोगे।
मुझे तो एक बात विपक्षियों से पूछनी थी, क्या नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाने से कोरोना भाग जाएगा ? या चीन भाग जाएगा ? अरे सरकार की ग़लती पर ऊँगली उठाने की बजाय देश की सुरक्षा के लिए बॉर्डर पर जाओ देखा नहीं संघ ने 90 लाख स्वयंसेवकों को भेजने की घोषणा की है और बॉर्डर में जाने से डर रहे हो तो कोरोना पीड़ितों के पास जाकर उनके साथ कुछ दिन बिताओ या झुग्गी बस्तियों में जाकर मज़दूरों और ग़रीबों के साथ कुछ दिन रहो , ग़रीबों का दर्द बाँटो । सरकार की हर ग़लती तुम्हें दिख जाती है । सत्ता तो कुछ कर ही लेगी लेकिन तुम्हें सड़क पर तड़फते मज़दूर , तिल तिल कर मरते मध्यम वर्ग पर तरस नहीं आता । कोरोना और लॉकडाउन की वजह  अनाथ हुए बीबी बच्चों पर तरस नहीं आता , शहीद हुए  बीस जवानो के बीबी बच्चों पर तरस नहीं आता जो सरकार को झूठा कहते हो।
तुम लोग कौन सा इंक़लाब ला दोगे , तुम लोग अपने उद्देश्यों से भटक गए हो । देश सेवा ! काहे का देश सेवा ! देश की जनता जान चुकी है कि तुम केवल एक ऐसे आदमी के पीछे पड़े हो जो सच्चाई और ईमानदारी के साथ सिर्फ़ देश सेवा कर रहा है , क्या तुम्हारे राज में पेट्रोल डीज़ल का रेट नहीं बढ़ा।
प्रधानमंत्री की सच्चाई तुम्हें नज़र नहीं आती? एक आदमी जो होली दिवाली और नवरात्रि जैसा त्यौहार घर में ना मनाकर सैनिकों के बीच मनाता है , जो तीन  सालों से आम लोगों से मन की बात करता है, जिसकी मॉ प्रधानमंत्री आवास की राजसी ठाट छोड़ अपने छोटे से मकान में रहती है , भाई पत्नी सब दूर रहते हैं , यह सब किसके लिए कर रहा है वह। विश्व के तमाम देशों में जाकर वह किसके लिए सहायता माँग रहा है। आम जनता से सहयोग माँगने उन्हें रोना तक पड़ा है किस बात के लिए , कालाधन समाप्त करने न, तो फिर यह सब किसके लिए ?  देश के आम लोगों के सुख के लिए ही ना, वह भी तुमसे देखा नहीं जाता ।
एक अकेला व्यक्ति 125 करोड़ हिंदुस्तानियों के हिस्से का ज़हर नमो नमो बनकर पी रहा है आख़िर क्यों ? प्रधानमंत्री जैसे सच्चे पुरुष को इतना परेशान करना कहाँ तक उचित है , उनके जैसे हिम्मती पुरुष को बताना पड़ा कि कुछ लोग मुझे ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे ? इससे तुम्हारी मंशा साफ़ दिखता है कि नरेंद्र मोदी को हटाने तुम लोग किस हद तक जा सकते हो ।
देश के इतिहास में प्रधानमंत्री ऐसे इकलौते शख़्स हैं, जिन्होंने इतने सारे दुश्मनो की नींद हराम कर दी है, दाऊद इब्राहिम, हाफ़िज़ सईद, चीन, पाकिस्तान, आईईएस, सब उनके पीछे पड़े हैं, एक बात ध्यान रखना यदि मोदी आतंकवाद, कालाधन , भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं कर सका तो कोई माई का लाल ख़त्म नहीं कर सकता । ऐसा व्यक्ति सदियों में पैदा होता है और तुम लोग उसके ख़िलाफ़ चक्रव्यूह रच रहे हो। 
मुझे पता है कि विपक्ष के लोग क्यों प्रधानमंत्री के पीछे पड़े हैं, तुम्हें उनका सच पर चलना देखा नहीं जाता । न खाऊँगा , न खाने दूँगा कहकर उन्होंने तुम्हारा खाना बंद कर दिया है किसी एक का धंधा चलते तुमसे देखा नहीं जाता। तुम सत्ता के शीर्ष पर बैठे नैतिकवान से अनैतिकता की उम्मीद करते हो और सोचते हो कि सब मिलबैठ कर खाए , तुम सोचते हो कि तुम्हारे ग़लत काम पर तुम्हें जेल न भेजे और सिर्फ़ राजनीति करे । 
देश की जनता ये बात अच्छी तरह जानती है कि दस्यु कर्म तब और ज़्यादा फलता फूलता है जब सत्ता की ताक़त साथ होती है । और इससे आम आदमी कैसे लड़ेगा। जनता अब यह भी जान चुकी है एक जाएगा तो दूसरा आएगा! स्थिति कम ज़्यादा हो सकती है और जब यह सब रहना ही है तो फिर कोई कितना लड़ेगा और लड़ने से क्या फ़ायदा। एक तो बढ़ती महँगाई ने वैसे भी घर परिवार चलाना दूभर कर दिया है। ज़िंदगी जीने में कम परेशानी है जो सरकार से लड़कर अपनी परेशानी बढ़ायें। इसलिए यही कहना बेहतर है कि सब गुड-गाड है।
हवा में घूमते ये शब्द को सहेजना आसान नहीं था , कोई कैसे पढ़ पाता मैंने इसे सहेजने की कोशिश की है ।

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